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Fitter - फिटर किसे कहते हैं? | प्रकार

Fitter - फिटर किसे कहते हैं? | प्रकार

दोस्तों, आज की इस पोस्ट में हम फिटर (Fitter) के बारे में बात करने वाले हैं। फिटर किसे कहते हैं? फिटर का क्या स्कोप है, Fitter कितने प्रकार के होते हैं? आदि के बारे में जानेंगे।

फिटर जन्मजात नहीं होता है। फिटर कोई भी व्यक्ति बन सकता है। फिटर बनने के लिए केवल उसको फिटिंग से संबंधित जानकारी थ्योरिटिकल व प्रैक्टिकल होनी चाहिए। जो भी व्यक्ति फिटर की जानकारी थ्योरिटिकल व प्रैक्टिकल ले लेता है। वही फिटर (Fitter) कहलाने का हकदार होता है।

फिटर किसे कहते हैं?

Fitter उस व्यक्ति को कहते हैं, जिसको मशीनों (Machines) के निष्क्रिय कल-पुर्जों को बदलने व मशीनों को दोबारा चलाने की स्थिति में लाने वाले का ज्ञान होता है।

आज के समय में सभी प्रकार के इंडस्ट्रियल काम, खेत के काम को करने व कन्स्ट्रक्शन प्रोजेक्ट को पूरा करने के लिए मशीनों का उपयोग किया जाता है। इन कामों को करने के लिए, जब लगातार मशीन (Machine) चलती रहती है तब उनको पार्ट्स या कल-पुर्जों में घिसावट व टूट-फूट होती रहती है। इसलिए मशीने खराब हो जाती हैं इन मशीनों को फिटर (Fitter) ही ठीक करके काम योग्य बनाता है।

एक योग्य फिटर को मशीनों पर की जाने वाली सभी क्रियाओं जैसे- टर्निंग, फाइलिंग, ड्रिलिंग, वैल्डिंग, चिपिंग, रीमिंग, फोर्जिंग, सोल्डरिंग, पाइप फिटिंग, मरम्मत कार्य व शीट-मैटल कार्य आदि आने चाहिए। इसके अलावा उसको विभिन्न टूल्स व पुर्जे जैसे- नट, बोल्ट, हैमर, स्क्रू, हैक्सॉ, छेनी, रेती, वाइस व मशीनों के बारे में जैसे- लेथ मशीन, ड्रिल मशीन आदि थ्योरिटिकल व प्रैक्टिकल ज्ञान होना बहुत आवश्यक है।

Fitter का फुल फॉर्म क्या होगा?

फिटर का फुल फॉर्म निम्न प्रकार से है-

  • F - Fitness
  • I - Intelligent
  • T - Talented
  • T - Target
  • E - Efficient
  • R - Regularity

Fitter कितने प्रकार के होते हैं?

  1. पाइप फिटर
  2. बेंच फिटर
  3. डाई फिटर
  4. असेम्बली फिटर
  5. मैन्टिनेन्स फिटर
  6. फेब्रिकेशन फिटर

इन सभी फिटर के बारे में नीचे विस्तृत से जानकारी दी गई है-

पाइप फिटर किसे कहते हैं?

पाइप संबंधी फिटिंग व मरम्मत के काम करने वाले व्यक्ति को पाइप फिटर कहते हैं। हम अपने घर में पाइप लगाते हैं या पाइप रिपेयर करवाते हैं तब प्लंबर को बुलाते हैं। उस प्लंबर को ही पाइप फिटर (Pipe Fitter) कहते हैं।

बेंच फिटर किसे कहते हैं?

इस तरह के फिटर अधिकतम काम बेंच पर रेती द्वारा करते हैं। यह बेंच पर जॉब को या किसी मशीन के पार्ट्स को वाइस (Vice) द्वारा जकड़कर रेती द्वारा उचित फिटिंग देते हैं। एक कुशल बेंच फिटर को ड्रिलिंग, कटिंग, फाइलिंग, थ्रेडिंग व चिपिंग आदि प्रोसेस को करने की आवश्यकता होती है। इन प्रोसेस को करने के लिए विभिन्न प्रकार के सूक्ष्ममापी यंत्रों व उपकरणों का उपयोग किया जाता है।

डाई फिटर किसे कहते हैं?

आज के समय में कंपनियों में वस्तुओं को बनाने के लिए मोल्डिंग प्रोसेस की जाती है। इस प्रोसेस द्वारा ही प्लास्टिक के सभी प्रोडक्ट बनते हैं। इस प्रोसेस को करने के लिए मोल्डिंग मशीन का उपयोग किया जाता है। इस मशीन द्वारा प्रोडक्ट जैसे- पेन, स्केल, खिलौने, रबड़ प्रोडक्ट, फोन चार्जर आदि बनाए जाते हैं। इस मशीन के द्वारा प्रोडक्ट बनाने से पहले एक कॉपी प्रोडक्ट भी तैयार किया जाता है। यह काम डाई फिटर ही करता है।

असेम्बली फिटर किसे कहते हैं?

इस तरह के फिटर मशीन के पुर्जों को खोल व फिट कर देते हैं। यह फिटर ही मोटरसाईकिल, ट्रक, बस, ट्रैक्टर आदि के इंजन (Engine) को खोलकर रिपेयर करके फिट करते हैं।

मैन्टिनेन्स फिटर किसे कहते हैं?

इस फिटर का काम बंद पड़ी मशीन को दोबारा चलाने योग्य बनाने का काम होता है। इनको वह सभी जानकारी होती है, कि बंद पड़ी मशीन में क्या कमियां हो सकती हैं।

फेब्रिकेशन फिटर किसे कहते हैं?

यह फिटर धातु की चादर को रिवेटिंग प्रोसेस द्वारा जोड़कर वस्तुओं को बनाते हैं। यही अलमारी, बक्सा, ट्रंक व जाली का निर्माण कार्य करता है।

फिटर कैसे बनता है? | Fitter kaise banta hai?

किसी भी व्यक्ति को फिटर (Fitter) बनने के लिए आईटीआई (ITI) में प्रवेश लेना पड़ेगा। यह कोर्स दो वर्ष का होता है। यह आईटीआई का ट्रेड होता है। संस्थान में प्रवेश लेने वाले व्यक्ति या छात्रों को पहले सप्ताह में ही संस्थान (Institute) में होने वाली विभिन्न गतिविधियों से अवगत कराया जाता है। यह निम्न प्रकार से हैं-

  • संस्थान में छात्रों की एक सप्ताह में 42 घंटे तक कक्षाएं चलती हैं। जिसमें से 12 घंटे थ्योरिटिकल व 30 प्रैक्टिकल होता है।
  • प्रयोगशाला में जाने पर छात्रों को काम करने के लिए अच्छे उपकरण (Best Devices) दिए जाते हैं।
  • इंस्टीट्यूट में छात्र की 80% उपस्थिति अनिवार्य है। इससे कम उपस्थिति होने पर परीक्षा में बैठने की अनुमति नहीं दी जाती है।
  • संस्थान में ज्यादातर काम मशीनों पर होते हैं। मशीनों पर काम के समय दुर्घटना (Accident) की स्थिति में डॉक्टर के साथ चिकित्सा की सुविधा भी होती है।
  • इसमें जनजाति व अनुसूचित जाति के छात्रों को छात्रवृत्ति भी दी जाती है।
  • प्रत्येक छात्र को काम करते समय डांगरी भी दी जाती है।
  • छात्रों के लिए इंस्टीट्यूट में खेल-कूद, पुस्तकालय व मनोरंजन की व्यवस्था भी होती है। इसके साथ ही छात्र NCC में भी भाग ले सकता है।
  • इंस्टीट्यूट में प्रशिक्षण के समय काम करते समय उपयोग किया जाने वाला कच्चा माल , टूल आदि सामान ट्रेनर से मागने पर स्टोर से दिया जाता है। इन सभी टूल्स, उपकरणों आदि की जिम्मेदारी छात्रों की होती है। अतः छात्रों को इन सामानों को भली-भांति स्टोर करके रखना चाहिए।
  • संस्थान में राजपत्रित छुट्टी के अलावा प्रत्येक प्रशिक्षार्थी को आकस्मिक छुट्टी (12 दिन), मैडिकल अवकाश (15 दिन) व विशेष अवकाश (15 दिन) भी दिए जाते हैं।

ऊपर दी गई सभी जानकारी नए छात्रों को प्रशिक्षण के पहले सप्ताह में दी जाती है जिससे छात्र प्रशिक्षण में रूचि लेकर काम कर सकें व ट्रेनर की अनुपस्थिति में दूसरे ट्रेनर की सहायता से अपना काम कर सकें।